थराली उपचुनाव में उठने लगे बगावत के सुर,भाजपा कैसे बचाएगी मुन्नी की साख !

थराली उपचुनाव में सबसे ज्यादा खलबली है तो वो है भाजपा के खेमे में। दरअसल थराली का माहौल इस बार कुछ बदला-बदला दिखाई दे रहा है। गैरसैंण राजधानी बनाने का मुद्दा चौक चौराहों की चुनावी चौपाल पर हावी हो रहा है। वहीं पूर्व विधायक स्वर्गीय मगनलाल शाह की धर्मपत्नी मुन्नी देवी पर भाजपा के दांव खेलने के बाद भितराघात की संभावनाओं को भी बल मिल रहा है। हालांकि मुन्नी देवी चमोली जिला पंचायत की अध्यक्ष हैं लेकिन

सूत्रों की माने तो क्षेत्र में सक्रिया भाजपा कार्यकर्ता बलवीर घुनियाल,  नरेंद्र भारती जैसे भाजपा के जिलास्तरीय पदाधिकारियों के तेवर भाजपा को मुश्किल में डाल सकते हैं। दोनों नेताओं के तेवर अभी तक तल्ख हैं। दोनों नेता 2017 के आम चुनाव में भी पार्टी आलाकमान के सामने अपनी दावेदारी पेश कर चुके हैं। हालांकि उस वक्त आलाकमान ने स्व.मगनलाल शाह को टिकट थमाया जबकि तल्खी दिखाने वाले नेताओं को कुछ झुनझना थमाकर और पार्टी की साख की दुहाई देकर बागी बनने से बचा लिया था। लेकिन इस उपचुनाव में नरेंद्र भारती और दलवीर घुनियाल के तेवरों को देखकर  2017 वाला अनुशासनिक सीन बन पाएगा कहना मुश्किल है। दरअसल घुनियाल औ भारती का दावा है कि मुन्नी देवी को टिकट मिलने के बाद  वे बतौर निर्दलीय दावेदार थराली उपचुनाव में ताल ठोकेंगे। ऐसे में तय है कि अगर दोनों नेता अपने दावे पर कायम रहे तो भाजपा की मुश्किलें बढ़नी तय हैं।   

गौरतलब है कि नरेंद्र भारती के पिता प्रेमलाल भारती इलाके में जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता रहे हैं। वहीं खुद नरेंद्र भारती थराली विधानसभा सीट पर भाजपा के नामी कार्यकर्ता रहें हैं और बूथ से लेकर यूथ तक और अपनी बिरादरी से लेकर गैर विरादरी तक भारती परिवार की साख है। भारती भाजपा के जिला संगठन में भी पद पर रह चुके हैं और भाजपा के अनुसूचित जाति जनजाति मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष भी रहे हैं। वहीं भारती मौजूदा वक्त में सांसद बी.सी.खंडूडी के  थराली विधानसभा क्षेत्र में सांसद प्रतिनिधि भी हैं।

उधर 2017 के चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जबरदस्त मोदी लहर में भी तीसरे नंबर पर रहे गुड्डू लाल का भी दावा है कि वे थराली में उपचुनाव में उतरेंगे। हालांकि पहले खबर उड़ी थी कि भाजपा गुड्डू लाल को टिकट दे रही है लेकिन फिर समीकरण गड़बड़ा गए और गुड्डू का नाम भाजपा खेमे में उछल कर मुन्नी देवी के सामने धड़ाम हो गया। ऐसे में तय है कि गुड्डू लाल के तेवर तल्ख रहेंगे और वे निर्दलीय ताल ठोक कर ही रहेंगे 2017 के आम चुनाव की तरह।     

बहरहाल असल बात ये है कि थराली में गैरसैंण स्थाई चुनाव का मुद्दा मुहं बाए खडा है। जबकि साल 2014 वाली मोदी लहर का फिलहाल थराली में अता-पता नहीं है। हालांकि पार्टी के लंबरदारों का कहना है कि भाजपा के फेवर में अंडर करंट है। स्वर्गीय मगनलाल शाह के असामयिक निधन से शाह परिवार के प्रति थराली की जनता में सहानुभूति की लहर भी है। सच क्या है इसका पता तो 31 मई को ही पता चल पाएगा।

लेकिन असल बात ये है कि अगर वाकई में तीन-तीन भाजपाई नेताओं ने बगावत की तो भाजपा उम्मीदवार मुन्नीदेवी की राह मुश्किल हो जाएगी और कहीं ऐसा न हो कि लोगों को दबंग फिल्म का वो गीत याद आ जाए .....मैं झंडू बाम हुई....!

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